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उत्तराखंड के त्योहार

गढ़वाल, कुमाऊँ और जौनसार-बावर के पारम्परिक त्योहार — हर पर्व के पीछे एक अनूठी सांस्कृतिक परम्परा, लोक विश्वास और प्रकृति के साथ हमारा जुड़ाव।

🌱 12+ त्योहार🏔️ तीनों क्षेत्र📖 सांस्कृतिक विवरण
पूरा उत्तराखंडगढ़वालकुमाऊँजौनसार-बावर

जनवरी

🥩Jaunsar-Bawar

मरोज

Maroj

जौनसारी समाज कु म्हैना भर चलणु वाळु जाड़ा कु पर्व — माघ बटि शुरू होंद। मांस का पकवान, लोक गीत औ समाज कु मेळ जुळ।

☀️पूरा UK

उत्तरायणी · मकर संक्रांति

Uttarayani / Makar Sankranti

सुर्ज मकर राशि म औंद — बागनाथ (बागेश्वर) म पवित्र स्नान, उत्तरायणी मेला औ पूरा पहाड़ म तिळकुट कु प्रसाद बंट्द छ।

फरवरी

🌼पूरा UK

बसंत पंचमी

Basant Panchami

बसन्त ऋतु कु आगमन — नौना-नौनी पढ़णु शुरू करदा छन औ पहाड़ुं म पीळी सरसुं का फूल खिलदा छन।

मार्च

🔱Kedarnath

महा शिवरात्रि

Maha Shivratri

भगवान शिव कि महा रात्रि — केदारनाथ, जागेश्वर औ देवभूमि का सब्बि शिव मन्दिरुं म बहुत महिमा कु दिन।

🌸Garhwal

फूल देई

Phool Dei

चैत्र संक्रान्ति — नौना-नौनी हर घौर कि देहरी म बसन्त का फूल चढ़ौंदा छन औ हर परिवार तैं सम्पन्नता कु आशीर्वाद दिन्दा छन।

अप्रैल

🎉Kumaon

बिखौती · बिस्सू

Bikhauti · Bissu

बैसाखी संक्रान्ति — द्वाराहाट (कुमाऊँ) म बिखौती मेला औ जौनसार म तांदी-हारुल नृत्य सँग बिस्सू पर्व मनौंदा छां।

जुलाई

🌱Kumaon

हरेला

Harela

सौंण संक्रान्ति — सात अनाज बौंदा छां औ हरियाली कि पूजा करदा छां। यो फसल, सम्पन्नता औ धरती मैया कु आदर कु प्रतीक छ।

अगस्त

🧈Kumaon

घी संक्रांति · ओल्गिया

Ghee Sankranti (Olgia)

भादौं संक्रान्ति — पैलु दिन घ्यू खाणा कु। किसान औ कारीगर अपणा मालिकु तैं ओल्गिया (भेंट) दिन्दा छन।

सितम्बर

🛕Almora

नन्दा देवी मेला

Nanda Devi Mela

सदियूं पुराणु मेला — माँ नन्दा देवी कु सम्मान म लग्द छ। नन्दा देवी कुमाऊँ औ गढ़वाळ का पहाड़ुं कि कुलदेवी छ।

🔥Kumaon

खतरुआ

Khatarua

आश्विन संक्रान्ति — खेतुं म आग जळैक ऋतु बदळणा कु संदेश दिन्दा छां। यो दिन कुमाऊँ का चन्द राजा कि गढ़वाळ पर जीत कु भि पर्व छ।

नवम्बर

🪔पूरा UK

दीपावली

Diwali

दीयों कु त्योहार — पूरा पहाड़ म दीया जळैक, रंगोली बणैक औ परिवार सँग पकवान खैक मनौंदा छां।

🎆Garhwal

इगास बग्वाल

Igas Bagwal

गढ़वाळ कि "दूसरी दीवाली" — दीवाली का ग्यारह दिन बाद भैलो (आग कि रस्सी घुमौणु), लोक नृत्य औ पारम्परिक खाणा सँग मनौंदा छां।

🌿 पहाड़ के त्योहारों की खासियत

प्रकृति से जुड़ाव: हर त्योहार ऋतु परिवर्तन, फसल चक्र या नदियों-पहाड़ों से जुड़ा है। हरेला (मानसून), घी संक्रांति (भाद्रपद), उत्तरायणी (मकर संक्रांति) — प्रकृति की लय के साथ।
लोक परम्परा: भैलो जलाना, फूल चढ़ाना, सात अनाज बोना, लोक नृत्य-गीत — पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक परम्परा से आगे बढ़ी।
सामाजिक मेळ: पहाड़ के त्योहार सिर्फ धार्मिक नहीं — ये समाज को जोड़ते हैं। मेले व्यापार, विवाह सम्बन्ध और सामूहिक उत्सव के मौके भी थे।
तीन संस्कृतियाँ: गढ़वाल, कुमाऊँ और जौनसार-बावर — तीनों के अपने अनूठे त्योहार और परम्पराएं। इगास बग्वाल (गढ़वाल), बिखौती (कुमाऊँ), मरोज (जौनसार)।
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